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रविवार, 12 फ़रवरी 2012

नदी अभी जागी है



सुनो नदी अभी जागी है 
अभी तो सिराये हैं मैंने 
कुछ पूजा के फूल और
कुछ यादें पिछली रातों की
कुछ कलियाँ अपनी बातों सी
कोई कश्ती पिछली बरसातों की

सच! नदी अभी जागी है...! 
अभी तो बिखराए हैं मैंने
कुछ अहसास तूफानी लहरों से
कुछ मौन तुम्हारी बातों के...
कुछ पीले पन्ने ख्वाहिशों के 
कुछ सूखे फूल किताबों से...

हाँ ! नदी अभी जागी है
अभी तो सुनायी है मैंने 
कुछ बातें बीती रातों की 
कुछ दौड़ भाग भी दिन भर की
कुछ इठलाती खिलती ढलती सी
इक वेणी मेरे बालों की...

देखो! नदी अभी जागी है
अभी तो जगाई है मैंने 
इक आस तेरे आवन की...
कुछ टपकती गिरती बूँदें भी
वो पहले अपने सावन की...
निसिगंधा के फूलों की
कुछ महक वही मनभावन सी...
अब मान भी लो...जान भी लो 
नदी अभी जागी है...! 

18 टिप्‍पणियां:

Shanti Garg ने कहा…

कुछ अनुभूतियाँ इतनी गहन होती है कि उनके लिए शब्द कम ही होते हैं !बहुत बेहतरीन और प्रशंसनीय.......
मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।

रश्मि प्रभा... ने कहा…

देखो! नदी अभी जागी है
अभी तो जगाई है मैंने
इक आस तेरे आवन की...
कुछ टपकती गिरती बूँदें भी
वो पहले अपने सावन की...
निसिगंधा के फूलों की
कुछ महक वही मनभावन सी...
अब मान भी लो...जान भी लो
नदी अभी जागी है...! ... दिल की गहराई से इस जागरण को शब्द दिए हैं

Dr.Priya ने कहा…

शांति जी,
सही कहा आपने मन कि गहन अनुभूतियाँ कहाँ शब्दों की मोहताज़ होती हैं...मेरे ब्लॉग पर आपका आना ठंडी बयार सा सुखद है...धन्यवाद!

Dr.Priya ने कहा…

रश्मिप्रभा जी...
आपने शब्दों का चन्दन मेरे ब्लॉग पर क्या छिड़का... देखिये दिशाएं महक उठीं...धन्यवाद !

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत उम्दा अभिव्यक्ति!!

प्रेम सरोवर ने कहा…

समय के साथ संवाद करती हुई आपकी यह प्रस्तुति बहुत ही अच्छी लगी । मेरे नए पोस्ट "भीष्म साहनी" पर आपका बेशब्री से इंतजार रहेगा । धन्यवाद ।

plz. remove word verification.

Dr.Priya ने कहा…

समीर जी
बहुत शुक्रिया आभार आपके आने का और सराहने का भी ...!

Dr.Priya ने कहा…

धन्यवाद प्रेम सागर जी...आप के ब्लॉग पर हम आ चुके हैं बस आप ने ही नही देखा...!

राजेन्द्र अवस्थी ने कहा…

बहुत ही सुन्दर रचना वास्तव में मै अभीभूत हूँ आपकी रचना पढ़ के शब्दों की क्लिश्टता कहीं है ही नहीं, आज पहली बार मैने आवका ब्लाग देखा अब तो रोज़ आपकी रचनाओं को पढ़ुगां.......

सुरेन्द्र "मुल्हिद" ने कहा…

khoobsoorat abhivyaktee!!

केवल राम : ने कहा…

भावों का बेहतर प्रस्तुतीकरण ....सच में नदी अभी जागी है .....!

Dr.Priya ने कहा…

राजेंद्र जी,
आप के मीठे शब्दों से मैं कितनी अभिभूत हूँ..यह शब्दों में बांधना भी मुश्किल है...! हम भी आपका इंतज़ार करेंगे...धन्यवाद !
प्रिया

Dr.Priya ने कहा…

सुरेंदर जी,
बहुत दिनों बाद दर्शन दिए,धन्यवाद! आपका तो हम अपने पंजाबी ब्लॉग पर इंतज़ार कर रहे थे...! पता है... sandalipaidan.blogspot.in
प्रिया

Dr.Priya ने कहा…

केवल जी...
हमारे ब्लॉग पर आपका सुस्वागत...धन्यवाद ! जी हाँ नदी अभी जागी है...!

sangita ने कहा…

बहुत बेहतरीन और प्रशंसनीय
मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।

Dr.Priya ने कहा…

Dhanyavaad Sangeeta ji...Love to see you here.

Mukesh Kumar Sinha ने कहा…

jagi hui nadi ke khubsurat shabd... bah rahe hain mano:)

Dr.Priya ने कहा…

Dhanyavaad Mukesh ji...mere blog par aapka Swagat hai...