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बुधवार, 1 सितंबर 2010

क्या ढूंढते हैं.....?


लोग मुझ में तेरी 
तस्वीर ढूंढते हैं...
देखो मैं क्या हूँ
मुझ में क्या ढूंढते हैं...?
बरसते बरसते 
बांसुरी बन गयी हूँ.... 
लोग मुझ में तेरी
तासीर ढूंढते हैं...!
देखो मैं क्या हूँ....
मुझ में क्या ढूंढते हैं.....?
होंठों तक आती तो
कुछ और गीत गाती
लोग मेरी रागिनी से 
तेरा पता पूछते हैं...
देखो मैं क्या हूँ....
मुझ में क्या ढूंढते हैं.....?
खुद को जलाया 
चरण-धूलि बनाया ...
अंगों लगाया..उमंगों सजाया....
लोग मेरी रज में  
तेरी रज़ा ढूंढते हैं...
देखो मैं क्या हूँ....
मुझ में क्या ढूंढते हैं.....?
बाँहों में आती
परस गुनगुनाती
तेरा लिखा कोई 
मिलन-गीत गाती
लेखनी में मेरी 
तेरा लिखा ढूंढते हैं...
देखो मैं क्या हूँ....
मुझ में क्या ढूंढते हैं.....?

12 टिप्‍पणियां:

arvind ने कहा…

Kavita bahut sunder hai bhav aur shilp kai aadhar par......Tum sunder ho ki veh sunder hai... Nahin jantey hain ki kisai dhundtey hain...mehktey mehktey kadamb ban gaya hun...shskhs hon jiski usai dhundtey hain....

एक स्वतन्त्र नागरिक ने कहा…

सुन्दर भावो को व्यक्त करती अच्छी कविता. आश्चर्य है कि आज के इस भौतिकवादी समय में नेट पर भी ऐसे व्यक्ति मिल जाते है जिनको वेद, पुराण, राम चरित मानस, उपनिषद आदि में रूचि हो.
यदि मीडिया और ब्लॉग जगत में अन्ना हजारे के समाचारों की एकरसता से ऊब गए हों तो कृपया मन को झकझोरने वाले मौलिक, विचारोत्तेजक आलेख हेतु पढ़ें
अन्ना हजारे के बहाने ...... आत्म मंथन http://sachin-why-bharat-ratna.blogspot.com/2011/08/blog-post_24.html

namita ने कहा…

रज मे रजा या फ़िर उसकी रजा मे हम,बात कुछ भी हो बस स्तिथि तो यह है कि उसमे समा जाना ही चरम अनुभुति.

बस ऐसे ही लिखती रहो...

नमिता

Dr.Priya ने कहा…

Parmatma...I'm speechless...karte ho tum kanhya mera naam ho raha hai...

Dr.Priya ने कहा…

Thanks Svatantra ji...

Dr.Priya ने कहा…

Aapki duaayen chahiyen Namita di...

रश्मि प्रभा... ने कहा…

लोग मेरी रज में तेरी रज़ा ढूंढते हैं...देखो मैं क्या हूँ....मुझ में क्या ढूंढते हैं....samarpit bhaw , jahan ek hone ka ehsaas hai

सुरेन्द्र "मुल्हिद" ने कहा…

priya ji mere yahaan aane ke liye shukriyaa....aapne bahut time se kuchh likkha nahee hai, kya baat hai??

Udan Tashtari ने कहा…

उम्दा रचना...लिखना क्यूँ बंद है?

Dr.Priya ने कहा…

Thanks Rashmi Prabha...I'm touched.

Dr.Priya ने कहा…

Surenderji aane ka dhanyavaad! Likhna shuru kiye dete hain...

Dr.Priya ने कहा…

Udan Tashtari...nahi to aap dekh lijiye...